कविता संग्रह "हमिंग बर्ड"

Saturday, June 16, 2012

"कितना अच्छा होता जो मानवीय भावनाओं को स्थूल रूप दिया जा सके | पागलपन की गोलियां बने - जो खोले, वही साहित्यकार | प्रेम की टिकिया हो, जिसे दे दो वही रात के तारे गिने | कविता का भी पाउडर बाजार में बिका करे | तब तो हम हर मित्र को यही उपहार में भेजा करें | कविता की पुडिया पानी के साथ खाओ और फिर छंद लिखो ...............:))"

5 comments:

  1. 1 pudiya mujhe bhi ubhar me bhej dijiyega.... :)

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  2. Kash esa ho jaye ...
    Very nice
    ;-);-)

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  3. patiपन की गोलियां बने - जो खोले, वही pati sath ho !!! |

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  4. बहुत ही सुन्‍दर

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