कविता संग्रह "हमिंग बर्ड"

Thursday, July 23, 2015

डॉ. भावना शेखर के शब्दों में "हमिंग बर्ड"


हमिंगबर्ड यानि लगभग 250 प्रजातियों वाली … 500 फ़ीट ऊंचाई तक उड़ने वाली, रग बिरंगी नन्ही सी चिड़िया जो जहाँ से गुज़र जाए आँखों में बस जाए। एक हमिंगबर्ड कुछ दिनों से मेरे सिरहाने रहती है। आज उस पर कुछ कहने का मन है। मुकेश कुमार सिन्हा ने अपनी कविताओ के पुलिंदे को नाम दिया है -- हमिंगबर्ड। बड़ा माकूल शीर्षक है। 

कवि का मन हमिंगबर्ड की तरह उड़ान भरता है। ज़िंदगी की हर अदा, हर पहलू हर चीज़ उसकी लेखनी को चंचल बना देती है। वह बहुत कुछ या मानें तो सब कुछ कहना चाहता है। क्या कोई डस्टबिन, तकिए, जूते के लेस या अख़बार पर भी कविता रच सकता है!! मुकेश की संवेदना का कोई ओर - छोर नहीँ....इनकी कविता का आकाश निस्सीम है। एक ओर ये प्रेम को परिभाषित करते हैं, रिश्ते-नाते , पुल, मकान और शहर को व्याख्यायित करते हैं तो दूसरी ओर चालीस और पचास की वय के बीच की चुहल …चोरी चोरी उमगते और फिर फुस्स हो जाते अरमानों को सार्वजनिक करने का माद्दा भी रखते हैं। इनकी शब्दयात्रा दैनन्दिन जीवन के हर पड़ाव से गुज़रती है। क़तरा भर ज़िंदगी भी इस सहज कवि के लिए अस्पृश्य, वर्जित या अनदेखी नही।


सहज भाव सुबोध भाषा … न लाग न लपेट, न रंच भर प्रपंच और बन गयी कविता। मुकेश की सृजनभूमि रमणीय …निस्संदेह हमिंगबर्ड पठनीय। अशेष मंगलकामनाएँ !!! 
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Dr. Bhavna Shekhar

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