कविता संग्रह "हमिंग बर्ड"

Tuesday, August 12, 2014

मन भी कितना उच्छ्रन्खल होता है न, अब देखो न पिछले दो दिन से मेरा मन कहता है काश मैं भी कोई ऐसी शख्सियत होता जिसके शब्द मायने रखते, भेड़-चाल की तरह लोग पीछे पड़े रहते :) , एक शानदार बड़ी फैन फोलोविंग होती :D और मैं ......... इंदिरा गांधी के उस शानदार भाषण.......

‘मैं आज यहां हो सकती हूं, कल नहीं हो सकती हूं.. मुझे चिंता नहीं कि मैं जीवित रहूं या नहीं रहूं। मेरी लम्बी उम्र रही है और मुझे गौरव किसी चीज़ पर है तो इस पर है कि मेरा सारा जीवन सेवा में गया और जब तक मुझमें सांस है तब तक सेवा में ही जाए। जब मेरी जान जाएगी तो मैं कह सकती हूं की एक—एक खून का कतरा जितना मेरा है, वो एक—एक खून का कतरा एक भारत को जीवित करेगा, भारत को मजबूती देगा’।"

............. के तरह मैं भी कुछ कहता, स्वतंत्रता दिवस के पूर्व और फिर किसी दिन मर-वर जाता :)
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खुद को याद करवाने के लिए एक बेहतरीन तरीका है न !!
कोई नहीं, लिखी हुई किताबें/कवितायेँ भी कभी न कभी उस शख्स को जीवित कर देती है ....... !!

लगता है खुद को छपवाए बिना मुझे चैन नहीं मिलेगा :) :) .......... शुभ दिन, हर दिन की तरह एक बार फिर झेलिये :D 

2 comments:

  1. बहुत सुंदर बात लिख लेते हो बबुआ

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